अमेरिका-इजराइल की युद्ध विरोधी शांति नीतियों और एलपीजी गैस की कमी और बढ़ती कीमतों के संबंध में राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

मोहम्मद नजीर कादरी पत्रकार अजमेर: अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा ) ने शुक्रवार को जिला कलेक्टर कार्यालय में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर अमेरिका-इजराइल की साम्राज्यवादी युद्ध नीतियों का कड़ा विरोध जताया और एलपीजी गैस की भारी कमी तथा आसमान छूती कीमतों के कारण गरीब महिलाओं व मजदूर वर्ग पर पड़ रहे संकट को तुरंत दूर करने की मांग की। संगठन की कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन में कहा कि भारत सरकार का वर्तमान रवैया न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय शांति के पक्ष में खड़े होने की अपनी ऐतिहासिक विरासत को धता बजा रहा है, बल्कि देश के गरीब कामकाजी वर्ग को भी महंगाई और भुखमरी के गर्त में धकेल रहा है। ज्ञापन में (ऐपवा ) ने स्पष्ट रूप से लिखा, “वर्तमान समय में अमेरिका और इजरायल की साम्राज्यवादी युद्ध नीति के प्रति भारत सरकार का रवैया काफी चिंताजनक है। भारत ने साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद के खिलाफ शांति के पक्ष में हमेशा दृढ़तापूर्वक अपने विचार प्रस्तुत किए हैं। पश्चिम एशिया आज एक खतरनाक मोड़ पर खड़ा है, जहां अमेरिकी-इजरायली आपराधिक युद्ध अभियान का खतरा लगातार मंडरा रहा है। ऐसे समय में मोदी सरकार को अमेरिका और इजराइल की युद्ध नीतियों के खिलाफ कड़ा विरोध जताना चाहिए था, लेकिन सरकार ट्रंप और उनके सहयोगी इजराइल को खुश करने में व्यस्त नजर आ रही है।” संगठन ने आगे कहा कि यह रवैया न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की संप्रभुता को कमजोर कर रहा है, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन में लड़ी गई निर्णायक लड़ाई की गौरवशाली विरासत को भी पीछे धकेल रहा है। “मोदी सरकार का यह दृष्टिकोण भारत को साम्राज्यवाद के सामने झुकने वाला देश साबित कर रहा है, जबकि हमारी जनता सदियों से उपनिवेशवाद के खिलाफ लड़ती आई है,” ज्ञापन में जोर दिया गया। ऐपवा ने विशेष रूप से महिलाओं और मजदूर परिवारों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय युद्धों और भारत के रुख का सीधा असर देश के गरीब वर्ग पर पड़ रहा है। “वर्तमान में महिलाएं और मजदूर भूख से मरने और पलायन करने के लिए मजबूर हैं क्योंकि वे एलपीजी गैस नहीं खरीद पा रहे हैं। गैस सिलेंडर की कीमतें इतनी ऊंची हो चुकी हैं कि आम घरेलू बजट में इसे शामिल करना असंभव हो गया है। यह बेहद दुखद स्थिति है,” संगठन ने लिखा। ज्ञापन में विस्तार से बताया गया कि एलपीजी की कमी और महंगाई ने गरीब परिवारों को रसोई गैस के विकल्प की ओर धकेल दिया है, जिससे महिलाओं को लकड़ी, कोयला या गोबर के उपले जलाने पड़ रहे हैं। इससे न सिर्फ उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है, बल्कि समय की भी भारी बर्बादी हो रही है। “गरीब कामकाजी महिलाएं दिन भर मजदूरी करके घर लौटती हैं तो रसोई बनाने के लिए घंटों संघर्ष करना पड़ता है। बच्चे भूखे रह जाते हैं। कई परिवार पलायन कर रहे हैं। यह स्थिति पूरी तरह से असहनीय हो चुकी है,” ऐपवा की कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में कहा। संगठन ने माननीय राष्ट्रपति से सीधे अपील की कि वे भारत के गरीब कामकाजी वर्ग को एलपीजी गैस की कमी से जूझने के लिए ठोस और तत्काल कदम उठाएं। “सरकार को सब्सिडी बढ़ानी चाहिए, गैस की सप्लाई सुनिश्चित करनी चाहिए और कीमतों पर अंकुश लगाना चाहिए। बिना किसी देरी के गरीबों को सस्ती और पर्याप्त एलपीजी उपलब्ध कराई जाए,” अपील में मांग की गई। ऐपवा ने भारत सरकार से भी जोरदार आवाज उठाने की मांग की। ज्ञापन में लिखा, “हम भारत सरकार से अपील करते हैं कि वह अमेरिका और इजराइल की साम्राज्यवादी युद्ध नीतियों और उपनिवेशवाद के खिलाफ और शांति के पक्ष में जोरदार आवाज उठाए। युद्ध में होने वाले किसी भी प्रकार के नुकसान का पूरा बोझ, जिसमें जान-माल का नुकसान भी शामिल है, महंगाई, कालाबाजारी और बेरोजगारी के रूप में गरीब लोगों को ही उठाना पड़ता है।” संगठन की कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन सौंपते समय कहा कि शांति और गरीबों के हित में भारत की नीति स्पष्ट और साहसी होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अभी भी अमेरिका-इजराइल की नीतियों का समर्थन या चुप्पी साधे रखी तो देश की जनता में असंतोष बढ़ेगा और सामाजिक-आर्थिक संकट और गहरा जाएगा। ज्ञापन सौंपने वाली टीम में ऐपवा की जिला इकाई की कई प्रमुख कार्यकर्ताएं शामिल थीं। जिला कलेक्टर ने ज्ञापन प्राप्त कर आश्वासन दिया कि इसे संबंधित उच्च अधिकारियों तक भेज दिया ! 'पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है और देश के अंदर महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ रखी है। ऐपवा का यह ज्ञापन न सिर्फ विदेश नीति पर सवाल उठाता है, बल्कि घरेलू मोर्चे पर गरीब महिलाओं की पीड़ा को भी मुख्यधारा में लाता है। संगठन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे पर आगे भी संघर्ष जारी रखेगा और राष्ट्रपति स्तर पर निरंतर फॉलो-अप करेगा। पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है और देश के अंदर महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ रखी है। ऐपवा का यह ज्ञापन न सिर्फ विदेश नीति पर सवाल उठाता है, बल्कि घरेलू मोर्चे पर गरीब महिलाओं की पीड़ा को भी मुख्यधारा में लाता है। संगठन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे पर आगे भी संघर्ष जारी रखेगा और राष्ट्रपति स्तर पर निरंतर फॉलो-अप करेगा।

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