पीर मिट्ठा वक्फ संपत्ति पर निर्माण को लेकर न्यायालय की रोक, काजी मुनव्वर अली की याचिका पर वक्फ अधिकरण में सुनवाई — 17 निजी पक्षकारों समेत अजमेर नगर निगम और वक्फ बोर्ड प्रतिवादी

अजमेर। दिल्ली गेट के अंदर स्थित पीर मिट्ठा वक्फ संपत्ति(प्रेम प्रकाश आश्रम)को लेकर राजस्थान वक्फ अधिकरण, जयपुर में दायर याचिका अब महत्वपूर्ण न्यायिक मोड़ पर पहुंच गई है। काजी मुनव्वर अली की ओर से दायर याचिका में संबंधित वक्फ संपत्ति पर कथित अवैध निर्माण, बिक्री और हस्तांतरण को चुनौती देते हुए तत्काल रोक लगाने की मांग की गई थी। जिस पर न्यायालय ने सुनवाई करते हुए मनोज भिरयानी व अन्य को निर्माण कार्य नहीं करने के लिए पाबंद किया है
17 निजी व्यक्तियों के नाम याचिका में शामिल
याचिका में मनोज भिरयानी, धीरज भाटिया, रवि मारोटिया, अनिल तेजवानी, अमित जैन, प्रदीप तेजवानी, चन्द्रप्रकाश मघनानी, जयप्रकाश मघनानी, रमेश तेजवानी, भरत कुमार, शंकर बालचंदानी, प्रदीप तेजवानी, अनिल तेजवानी, हितेश तेजवानी, श्याम डोडानी, सुरेश तुलसियानी और श्रीमती नायरा बालचंदानी को प्रतिवादी बनाया गया है।
इसके अलावा अजमेर नगर निगम और राजस्थान बोर्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
1934 के वक्फनामे का हवाला
याचिका में कहा गया है कि पीर मिट्ठा, दिल्ली गेट के अंदर स्थित संबंधित संपत्तियां वर्ष 1934 के वक्फनामे के माध्यम से वक्फ की गई थीं। याचिकाकर्ता का दावा है कि वक्फनामे में संपत्ति को हस्तांतरित अथवा गिरवी रखने पर प्रतिबंध का प्रावधान था। इसके बावजूद बाद के वर्षों में संपत्ति से संबंधित कथित बिक्री-पत्र एवं अन्य हस्तांतरण किए गए।
नगर निगम में शिकायत के बाद सामने आया मामला
याचिका के अनुसार संबंधित संपत्ति पर कथित अवैध निर्माण की जानकारी मिलने के बाद 11 अप्रैल 2026 को अजमेर नगर निगम में शिकायत की गई। इसके बाद याचिकाकर्ता ने कथित बिक्री-पत्रों की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त कीं और आरोप लगाया कि वक्फ संपत्ति से जुड़े विभिन्न हिस्सों का अलग-अलग व्यक्तियों के पक्ष में हस्तांतरण किया गया।
याचिका में वर्ष 2019 और 2025 में हुए बताए गए विभिन्न पंजीकृत बिक्री-पत्रों का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता ने इन हस्तांतरणों को वक्फ संपत्ति के संदर्भ में अवैध एवं शून्य बताते हुए चुनौती दी है।
राजेश विजयवर्गीय और हाजी फैयाज खान ने की पैरवी
काजी मुनव्वर अली की ओर से अधिवक्ता राजेश विजयवर्गीय और हाजी फैयाज खान ने न्यायालय के समक्ष पैरवी की। याचिकाकर्ता की ओर से न्यायालय के समक्ष यह पक्ष रखा गया कि संबंधित वक्फ संपत्ति में निर्माण कार्य किया जा रहा है और यदि तत्काल हस्तक्षेप नहीं हुआ तो संपत्ति की स्थिति बदल सकती है तथा वक्फ संपत्ति को अपूरणीय क्षति होने की आशंका है।
याचिका में प्रतिवादियों द्वारा कथित निर्माण कार्य जारी रहने का उल्लेख करते हुए न्यायालय से तत्काल अंतरिम राहत की मांग की गई थी।
15 सितंबर की सुनवाई के बाद निर्माण पर रोक
मामले में 15 सितंबर 2026 को सुनवाई हुई, जिसमें याचिकाकर्ता की ओर से रखे गए पक्ष के बाद संबंधित वक्फ संपत्ति पर निर्माण कार्य करने पर रोक लगा दी गई है
याचिका में अधिकरण से यह भी मांग की गई थी कि प्रतिवादी पक्ष संबंधित संपत्ति पर किसी भी प्रकार का निर्माण, तोड़फोड़, बिक्री, हस्तांतरण या अन्य अनधिकृत गतिविधि नहीं करे तथा मौके और रिकॉर्ड की स्थिति यथावत रखी जाए।

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