अजमेर कांग्रेस में सियासी पोस्टमार्टम,37 पार्षदों के बावजूद कांग्रेस को 37 वोट, भाजपा 43 पर पहुंची—कांग्रेस में हुआ भीतरघात, भाजपा से अनामिका शर्मा बनी मेयर

अजमेर। अजमेर नगर निगम के मेयर चुनाव का परिणाम सामने आते ही कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति पर सवालों का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस के 37 पार्षद पार्टी के सिंबल पर चुनाव जीतकर निगम पहुंचे थे, लेकिन मेयर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को 37 वोट ही मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी 43 वोट लेकर विजयी हुई।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा के 32 निर्वाचित पार्षद 43 के आंकड़े तक कैसे पहुंचे? वहीं कांग्रेस अपने 37 के आंकड़े से आगे क्यों नहीं बढ़ पाई?
राठौर की रणनीति पर फेरा पानी
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र राठौर ने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी। बाड़ेबंदी से लेकर पार्षदों को अजमेर से बाहर रखने और पार्टी नेतृत्व से मुलाकात तक, कांग्रेस खेमे ने एकजुटता दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
इसके बावजूद परिणाम कांग्रेस के पक्ष में नहीं आया। इससे राठौर की तमाम राजनीतिक कवायद के बावजूद कांग्रेस के अंदर मौजूद गुटीय खींचतान पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी।
खड़गे की मिठाई भी नहीं घोल पाई कांग्रेस की सियासी कड़वाहट!
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात के दौरान पार्षदों की एकजुटता का संदेश दिया गया था। खड़गे ने पार्षदों को अपने हाथों से मिठाई भी खिलाई। लेकिन मेयर चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस की अंदरूनी सियासत को फिर चर्चा में ला दिया।
मिठाई की मिठास के बावजूद वोटों का गणित कांग्रेस के पक्ष में नहीं बदल सका।
अब कांग्रेस में उठेगा सबसे बड़ा सवाल—कौन गया इधर से उधर?
कांग्रेस खेमे में अब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि पार्टी के 37 पार्षद अपने प्रत्याशी के साथ रहे, तो भाजपा के खाते में 43 वोट कैसे आए?
मतदान गोपनीय होने के कारण किस पार्षद ने किसे वोट दिया, यह प्रमाणित रूप से बताना संभव नहीं है, लेकिन परिणाम ने कांग्रेस के भीतर क्रॉस वोटिंग और भीतरघात की राजनीतिक चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है।
अजमेर कांग्रेस के लिए अब असली चुनौती मेयर चुनाव का परिणाम नहीं, बल्कि यह पता लगाना होगी कि संगठन के भीतर वह कौन-सी राजनीतिक दरार है, जिसे बाड़ेबंदी, बैठकों और शीर्ष नेतृत्व की मुलाकात भी नहीं भर सकी।
37 बनाम 43 का यह आंकड़ा आने वाले दिनों में अजमेर कांग्रेस की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रह सकता है।

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