चीन के नए राष्ट्रीय एकता कानून को बौद्व मठठ में मानवता वादी संगठनो ने वापिस लेने की रखी मांग, राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम भेजा ज्ञापन

सम्पादक,अब्दुल क़ादिर
अजमेर, 04 जुलाई 2026। बौद्ध मठ महाबोधि मिशन, महाबोधि एजुकेशन सोसायटी, महाबोधि विद्यालय गौतम नगर, जन सेवा समिति की सर्वधर्म समिति, अखिल भारतीय जन कल्याण ट्रस्ट, ऑल इंडिया कौमी एकता कमेटी, श्री अजमेर व्यापारिक महासंघ, अजयमेरू सेवा समिति सहित विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारियों ने शनिवार को महात्मा बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष एकत्र होकर तिब्बत की आजादी तथा उसकी सभ्यता और संस्कृति के संरक्षण की मांग उठाई। इस अवसर पर भारत के राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर चीन सरकार द्वारा लागू किए गए नए राष्ट्रीय एकता कानून की कड़ी निंदा करते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की गई। श्री अजमेर व्यापारिक महासंघ की सर्वधर्म समिति के संस्थापक एवं महासचिव रमेश लालवानी, बौद्ध मठ के अध्यक्ष गुणवन्त राहुल, सचिव श्रीमती सोनी राहुल, अखिल भारतीय जन कल्याण ट्रस्ट के अध्यक्ष अब्दुल कादिर मुल्तानी, जन सेवा समिति की सर्वधर्म समिति की महिला विंग की उपाध्यक्ष श्रीमती सुनीता चौधरी, श्रीमती नीतू दीपांकर राहुल, अजमेर जिला केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन्द्र, श्रीमती मधु तथा प्रधानाचार्या श्रीमती ममता धनेरिया सहित अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि यह कानून राष्ट्रीय एकता के नाम पर जातीय अल्पसंख्यक समुदायों पर राज्य का नियंत्रण बढ़ाने का प्रयास प्रतीत होता है। रमेश लालवानी ने कहा कि यह कानून चीन में अल्पसंख्यकों की भाषाओं, संस्कृतियों, धर्मों और उनकी पहचान को दबाने की दिशा में एक और कदम है। ज्ञापन के माध्यम से चीन सरकार से ऐसी नीतियों को वापस लेने का आह्वान किया गया जो जातीय अल्पसंख्यकों के अधिकारों, सम्मान, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक स्वतंत्रता को कमजोर करती हैं।

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