हस्तलिखित 300 वर्ष पुरानी गुरु ग्रंथ साहिब की विरासत लौटने पर सर्वधर्म प्रतिनिधियों ने जताई खुशी, सिख समाज को दी शुभकामनाएं

अब्दुल कादिर मुल्तानी,
अजमेर, 3 जुलाई 2026। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान सिख साम्राज्य से ले जाई गई लगभग 300 वर्ष पुरानी गुरु ग्रंथ साहिब की हस्तलिखित प्रति अब स्कॉटलैंड के सेंट्रल गुरुद्वारे को सौंप दी गई है। इस ऐतिहासिक विरासत की वापसी पर श्री अजमेर व्यापारिक महासंघ की सर्वधर्म समिति के प्रतिनिधियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सिख समाज को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। मुख्य संरक्षक कालीचरणदास खंडेलवाल, संस्थापक एवं महासचिव रमेश लालवानी, कार्यकारी अध्यक्ष राजेन्द्र मूरजानी, बाबा दीप सिंह सेवा समिति के संस्थापक एवं सचिव सरदार बलबीर सिंह, सरदारनी हरजीम कौर, श्रीमती कुशल जैन, सरदार जगजीत सिंह छाबड़ा, सरदार भजन सिंह, हाजी फखर काज़मी, एडवोकेट वाहेदा चिश्ती, बौद्ध मठ की सचिव श्रीमती सोनी गुणवन्त राहुल, जन सेवा समिति महिला विंग की उपाध्यक्ष श्रीमती सुनीता चौधरी, अखिल भारतीय जन कल्याण ट्रस्ट के मुख्य संरक्षक अनूप जायसवाल, सोनम किन्नर, अध्यक्ष अब्दुल कादिर मुल्तानी, ऑल इंडिया कौमी एकता कमेटी के अध्यक्ष बदरुद्दीन कुरैशी, गोविन्द लालवानी, के.एस. डेविड, बौद्ध मठ के अध्यक्ष गुणवन्त राहुल तथा तिब्बती गर्म वस्त्र विक्रेता एसोसिएशन के अध्यक्ष छो ग्याल्तसेन सहित अन्य प्रतिनिधियों ने इस ऐतिहासिक अवसर पर सिख समाज को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। सर्वधर्म समिति के महासचिव रमेश लालवानी ने बताया कि मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है कि अब श्रद्धालु स्कॉटलैंड के ग्लासगो स्थित सेंट्रल गुरुद्वारे में इस दुर्लभ हस्तलिखित प्रति के दर्शन कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि यह अमूल्य पांडुलिपि कभी सिख साम्राज्य के दूसरे महाराजा खड़क सिंह के अभिलेखागार का हिस्सा थी। माना जाता है कि इसका लेखन 1700 के दशक में हुआ था। वर्ष 1848 में अंग्रेजों द्वारा पंजाब के दुलेवाला किले पर कब्जे के दौरान इसे महाराजा खड़क सिंह के अभिलेखागार से अपने कब्जे में ले लिया गया था। अब लगभग तीन शताब्दियों बाद इस ऐतिहासिक धरोहर की वापसी को सिख इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के लिए एक महत्वपूर्ण एवं गौरवपूर्ण क्षण माना जा रहा है।

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