भारत की जीवंत सूफ़ी रूहानी विरासत ने रोशन किया विश्व का पहला 'सूफ़ीवाद' अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन,हाजी सैयद सलमान चिश्ती 800 वर्षों की चिश्ती मुहब्बत की विरासत को लेकर पहुँचे मोरक्को

  संपादक,अब्दुल क़ादिर,
रबात, मोरक्को — 11 जून 2026: वैश्विक अंतरधार्मिक सौहार्द और सूफ़ी विद्वत्ता के इतिहास में एक अभूतपूर्व पल में, 'सूफ़ीवाद पर पहला अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन' का समापन मोरक्को की राजधानी रबात में स्थित प्रतिष्ठित अकादेमी दु रोयाम दु मारोक में 10-11 जून 2026 को हुआ। इस ऐतिहासिक आयोजन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उपस्थित थे हाजी सैयद सलमान चिश्ती — दरगाह हज़रत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती ग़रीब नवाज़ (र.अ.) अजमेर शरीफ़, राजस्थान के 26वीं पीढ़ी के गद्दीनशीन एवं वंशानुगत क़िलाबरदार , और चिश्ती फ़ाउंडेशन के चेयरमैन — जिनकी उपस्थिति ने 800 वर्षों की जीवंत चिश्ती सिलसिले की ख़ुशबू को अरब जगत के केंद्र तक पहुँचाया। यह सम्मेलन संयुक्त रूप से रॉयल अकादेमी दु रोयाम दु मारोक और वलीयात ओएनजी इंटरनेशनेल द्वारा आयोजित किया गया था। इस दो-दिवसीय सम्मेलन में दुनियाभर से विद्वान, सूफ़ी रहनुमा, शोधकर्ता और आध्यात्मिक साधक एकत्रित हुए — इस उद्दीप्त विषय के तहत: "स्मृति को जागृत करो — भविष्य को आलोकित करो।" सात पैनलों में इस्लामी आध्यात्मिक परंपरा की शुरुआत से लेकर आज तक सूफ़ीवाद में रूहानी विरासत और जीवंत भूमिका पर गहन विचार-विमर्श किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता श्री अब्देलजलील लहजोमरी, अकादेमी दु रोयाम दु मारोक के स्थायी सचिव, और श्रीमती कैरोल लतीफ़ा अमीर, वलीयात ओएनजी की संस्थापक एवं अध्यक्षा ने की। उद्घाटन सम्बोधन में मोरक्को के शाहनशाह महामहिम राजा मोहम्मद षष्ठम् और स्वर्गीय राजा हसन द्वितीय के वरिष्ठ सलाहकार श्री आंद्रे अज़ौले की विशिष्ट उपस्थिति रही, जो अंतरधार्मिक संवाद, भूमध्यसागरीय सभ्यतागत आदान-प्रदान और सांस्कृतिक कूटनीति के क्षेत्र में विश्वस्तर पर सुपरिचित हैं।   सम्मेलन में भारत की सूफी चिश्ती विरासत का केंद्रीय योगदान - हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने सम्मेलन के दो महत्वपूर्ण पैनलों में अपना वक्तव्य दिया। "ज्ञान के जवाहरात: सूफ़ीवाद" में उन्होंने "भारत में सूफ़ी महिलाएँ: दिव्य प्रेम के मार्ग"विषय पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने एक अटूट रूहानी सिलसिले का चित्रण किया — हज़रत बीबी आमिना (र.अ.) और हज़रत बीबी मरियम (अ.स.) से लेकर हज़रत ख़दीजा (र.अ.), हज़रत आयशा (र.अ.) और हज़रत फ़ातिमा अज़-ज़हरा (अ.स.)तक, और फिर महान सूफ़ी संत हज़रत बीबी राबिया अल-बसरी (र.अ.) से होते हुए भारत की चिश्ती महिला संतों — हज़रत बीबी हाफ़िज़ा जमाल (र.अ.) और हज़रत बीबी फ़ातिमा साम (र.अ.)तक — जिनकी दरगाहों पर आज भी लाखों ज़ायरीन अजमेर शरीफ़ और दिल्ली में हाज़िरी देते हैं। "दिल में अमन से दुनिया के अमन तक" में हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने चिश्ती सिद्धांत "सभी के साथ अमन" पर अपना उद्बोधन दिया। उन्होंने बताया कि दरगाह अजमेर शरीफ़ का 800 वर्षों से अनवरत चला आ रहा लंगर— बिना किसी भेदभाव के सबके लिए खुली दस्तरख़्वान — आज भी अंतरधार्मिक अमन कि दुनिया में एक सबसे पुराना जीवंत मूल्य है। "हम रबात में सैलानी बनकर नहीं, बल्कि एक जीवंत लौ के अमानतदार बनकर आए। चिश्ती परंपरा में सूफी महिलाएँ — बीबी हाफ़िज़ा जमाल से लेकर उन नाम-गुम दरगाह की उन बुजुर्ग तक जिन्होंने आठ सदियों तक इलाही मुहब्बत की आग जलाए रखी — वे हमेशा जानती थीं जो दुनिया अब सीख रही है: कि अमन का एलान नहीं होता। अमन पर अमल किया जाता है। हर सुबह। हर खुले दरवाज़े पर। हर आत्मा का, बिना किसी अपवाद के स्वागत करके।" — हाजी सैयद सलमान चिश्ती, गद्दीनशीन, दरगाह अजमेर शरीफ़   अकादेमी दु रोयाम दु मारोक के स्थायी सचिव श्री अब्देलजलील लहजोमरी ने अपने उद्घाटन भाषण में सूफ़ी विरासत के स्त्री-आयाम को पुनः उजागर करने की सभ्यतागत ज़रूरत पर बल देते हुए कहा: "सूफ़ी महिलाओं की रूहानी विरासत इतिहास का कोई हाशिया नहीं है। यह उसके सबसे रोशन अध्यायों में से एक है। यह सम्मेलन अकादेमी की यह प्रतिज्ञा है कि यह अध्याय फिर कभी अनपढ़ा नहीं छोड़ा जाएगा।" — श्री अब्देलजलील लहजोमरी, स्थायी सचिव, अकादेमी दु रोयाम दु मारोक वलीयात ओएनजी इंटरनेशनेल की संस्थापक एवं अध्यक्षा श्रीमती कैरोल लतीफ़ा अमीर, जिनकी दूरदृष्टि से यह ऐतिहासिक सम्मेलन संभव हुआ, ने वैश्विक सूफ़ी समुदाय के लिए इसके महत्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा: "जब अजमेर शरीफ़ का गद्दीनशीन रबात में खड़े होकर बीबी हाफ़िज़ा जमाल और बीबी फ़ातिमा साम की बात करते है, तो वो कोई तक़रीर नहीं दे रहे, वो एक पुल बना रहा है। सभ्यताओं के बीच। सदियों के बीच। दिलों के बीच। वलीयात इसी पुल को संभव बनाने के लिए वजूद में आई।" — श्रीमती कैरोल लतीफ़ा अमीर, संस्थापक एवं अध्यक्षा, वलीयात ओएनजी इंटरनेशनेल मोरक्को के शाहनशाह के वरिष्ठ सलाहकार श्री आंद्रे अज़ौले — जिनकी उपस्थिति ने सम्मेलन को शाही दरबार का आशीर्वाद प्रदान किया — ने अपनी सुप्रसिद्ध दार्शनिक दृष्टि से कहा: "सभ्यताओं के बीच संवाद कोई विलासिता नहीं, यह एक अनिवार्य ज़रूरत है। संस्कृति और रूहानियत ही वे एकमात्र शक्तियाँ हैं जो वे पुल बना सकती हैं जो अकेली सियासत कभी नहीं बना सकती।" — श्री आंद्रे अज़ौले, वरिष्ठ सलाहकार, महामहिम राजा मोहम्मद षष्ठम्, मोरक्को   भारत और वैश्विक सूफ़ी समुदाय के लिए ऐतिहासिक महत्व हाजी सैयद सलमान चिश्ती की इस सम्मेलन में भागीदारी भारत की वैश्विक आध्यात्मिक कूटनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। दरगाह हज़रत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती ग़रीब नवाज़ (र.अ.) अजमेर शरीफ़ — जहाँ प्रतिवर्ष 3 से 4 लाख नहीं, बल्कि 3 से 4 करोड़ ज़ायरीन हर मज़हब और हर मुल्क से हाज़िर होते हैं, के वंशानुगत संरक्षक की अकादेमी दु रोयाम दु मारोक में उपस्थिति न केवल एक व्यक्तिगत सम्मान थी, बल्कि वैश्विक सूफ़ी विरासत में भारतीय चिश्ती परंपरा की केंद्रीयता की औपचारिक स्वीकृति भी थी। इस सम्मेलन में हज़रत मौलाना रूमी की बाइसवीं पीढ़ी की वंशज एवं अंतर्राष्ट्रीय मेवलाना फ़ाउंडेशन की अध्यक्षा एसिन चेलेबी बयरू के साथ-साथ मोरक्को, फ्रांस, सेनेगल, तुर्की, स्वीडन, दक्षिण अफ्रीका और अनेक देशों के विद्वान, शोधकर्ता और आध्यात्मिक साधक शामिल हुए। सम्मेलन का समापन 'रबात अपील' की प्रस्तुति के साथ हुआ, एक ऐतिहासिक घोषणापत्र जो वैश्विक संस्थाओं से यह आह्वान करता है कि वे सूफ़ी परंपरा में महिलाओं की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को मानवता की साझा सभ्यतागत स्मृति के अनिवार्य अंग के रूप में औपचारिक रूप से मान्यता दें, संरक्षित करें और सम्मानित करें।     हाजी सैयद सलमान चिश्ती के बारे में: हाजी सैयद सलमान चिश्ती, दरगाह हज़रत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती ग़रीब नवाज़ (र.अ.) अजमेर शरीफ़, राजस्थान के 26वीं पीढ़ी के गद्दीनशीन एवं वंशानुगत क़िलाबरदार हैं। वे चिश्ती फ़ाउंडेशन (www.chishtyfoundation.org) के चेयरमैन हैं और संयुक्त राष्ट्र, जी-20, ब्रिक्स, आसियान, हार्वर्ड विश्वविद्यालय तथा जयपुर एवं ब्रैडफ़र्ड साहित्य उत्सव सहित 75 से अधिक देशों के प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत की सूफ़ी विरासत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वे दुनियाभर में सूफ़ी मुसाफ़िर — आध्यात्मिक यात्री — के नाम से जाने जाते हैं। चिश्ती फ़ाउंडेशन के बारे में चिश्ती फ़ाउंडेशन अपने संस्थापक सिद्धांत "सभी से मुहब्बत, किसी से नफ़रत नहीं" के तहत कार्य करता है और अंतरधार्मिक सौहार्द, लंगर सेवा के माध्यम से मानवीय सेवा, और चिश्ती सूफ़ी मूल्यों, करुणा, सेवा और अमन के वैश्विक प्रसार के लिए समर्पित है।  ✦  सभी से मुहब्बत — किसी से नफ़रत नहीं  ✦ हज़रत ख्वाजा ग़रीब नवाज़ (र.अ.)

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