सिंगापुर में “सीना बा सीना” संवाद — सूफ़ी मुसाफ़िर हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने द वैगाबॉन्ड क्लब में दिल से दिल का अनूठा संगम रचाया

सिंगापुर, 2 जून 2026 — सिंगापुर के सैयद अलवी रोड स्थित द वैगाबॉन्ड क्लब, सिंगापुर, एक ट्रिब्यूट पोर्टफोलियो होटल में 1 जून 2026 की शाम कुछ असाधारण घटित हुआ। व्यापार जगत के अग्रणी, राजनयिक, परोपकारी व्यक्तित्व, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और सरल किन्तु जिज्ञासु हृदय एक छत के नीचे एकत्रित हुए और कुछ प्रकाशमान पलों के लिए एक बिखरी हुई दुनिया का शोर थम गया। यह आयोजन था सीना बा सीना: दिल से दिल — एक अंतरंग आध्यात्मिक संवाद, जिसमें सूफ़ी मुसाफ़िर हाजी सैयद सलमान चिश्ती — दरगाह अजमेर शरीफ़ के 26वें गद्दीनशीन एवं वंश-परम्परागत कुंजी-संरक्षक तथा चिश्ती फ़ाउंडेशन, भारत के अध्यक्ष — की उपस्थिति रही। आठ शताब्दियों की अटूट रूहानी विरासत को वहन करते हुए हाजी चिश्ती केवल एक विशिष्ट अतिथि के रूप में नहीं, बल्कि चिश्ती शिक्षा के जीवंत वाहक के रूप में सिंगापुर पधारे — वह शिक्षा जो कहती है कि प्रेम एक भावना मात्र नहीं, यह एक अनुशासन है, एक मार्ग है और एक उदात्त उत्तर है। गार्चा ग्रुप की मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरप्रीत बेदी गार्चा ने इस संवाद का कुशल, गरिमामय एवं बौद्धिक संचालन किया। इस सभा में राजनयिक, कॉर्पोरेट जगत के नेता, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और समाजसेवी उपस्थित रहे। सिंगापुर में भारतीय उच्चायोग के प्रथम सचिव श्री अजय सिंह ने अपनी उपस्थिति से शाम को राजनयिक गरिमा एवं महत्ता प्रदान की। द वैगाबॉन्ड क्लब, जो कला, संस्कृति और रचनात्मक समुदाय के दीर्घकालिक पोषण के लिए विख्यात है, सभ्यताओं के पार इस आध्यात्मिक संवाद एवं हृदय-संचरण की शाम का सहज एवं स्वाभाविक आयोजन स्थल सिद्ध हुआ। “दुनिया सूचनाओं की कमी से नहीं टूटी है — वह उपस्थिति की कमी से बिखरी है। जब एक दिल सच्चे भाव से दूसरे दिल से मिलता है — बिना किसी स्वार्थ के, बिना किसी आवरण के — यही सूफ़ी मार्ग है, यही जिज्ञासु हृदयों के लिए आध्यात्मिकता का पथ है। यही ख्वाजा ग़रीब नवाज़ (र.अ.) की शिक्षा है। प्रेम को जानने मत आओ — प्रेम बन जाओ।” — सूफ़ी मुसाफ़िर हाजी सैयद सलमान चिश्ती 26वें गद्दीनशीन, दरगाह ख्वाजा साहब, अजमेर शरीफ़ “जब मैंने पहली बार ‘सीना बा सीना’ — दिल से दिल — ये शब्द सुने, मुझे लगा मैं इन्हें समझती हूँ। आज रात, इस कमरे में बैठकर, मैंने इन्हें महसूस किया। यही वह अंतर है जो हाजी सैयद सलमान चिश्ती अपने साथ लेकर आते हैं। वे व्याख्यान नहीं देते — वे हृदय में उतर जाते हैं। सिंगापुर एक ऐसा नगर है जिसने हर सभ्यता के पार सेतु बनाए हैं — और आज रात वह सेतु भीतर की ओर बना। द वैगाबॉन्ड क्लब सदा से रचनात्मकता, संस्कृति और सार्थक संवाद के माध्यम से जीवन के हर वर्ग के लोगों को एक साथ लाता रहा है। वर्षों में हमने दुनिया भर के चित्रकारों, संगीतकारों, लेखकों, यात्रियों और विचारकों का हार्दिक स्वागत किया है — और अर्थपूर्ण संवाद एवं मानवीय जुड़ाव के लिए एक ऐसा स्थान बनाया है जहाँ हर दिल को घर जैसा लगे। हाजी सैयद सलमान चिश्ती और इस अविस्मरणीय सभा की मेज़बानी करना हमारे लिए अत्यंत सौभाग्य एवं गौरव की बात थी। सीना बा सीना की भावना द वैगाबॉन्ड क्लब में विशेष रूप से घर जैसी महसूस हुई — क्योंकि हम विश्वास करते हैं कि सबसे यादगार अनुभव तब जन्म लेते हैं जब लोग एक साथ आते हैं और वास्तविक मानवीय जुड़ाव के लिए एक खुला, आमंत्रणपूर्ण स्थान बनाया जाता है।” — हरप्रीत बेदी गार्चा मुख्य कार्यकारी अधिकारी, गार्चा ग्रुप संवाद की झलकियाँ यात्रा के बारे में: “एक मुसाफ़िर कभी नहीं पहुँचता — यही तो मार्ग की सुंदरता है। जहाँ भी जिज्ञासु और प्रेमी हृदय एकत्रित होते हैं, वहाँ वह पावन सुगंध पहले से विद्यमान होती है। हम तो बस उस सुगंध का अनुसरण करते हैं।” विरासत के बारे में: “यह न बोझ है, न उपहार — यह एक पवित्र अमानत है, जैसे एक दीप्तिमान सूर्य, एक अविरल बहती नदी, एक स्नेहशील धरती। यह विरासत हमारी नहीं है। हम तो बस एक खोखली नाय की तरह हैं — जैसा मौलाना रूमी (र.अ.) कहते हैं। जो संगीत प्रवाहित होता है वह हमारा नहीं — वह महबूब-ए-हक़ीक़ी का है।” बँटी हुई दुनिया के बारे में: “सबसे प्रेम, किसी से वैर नहीं। इसे किसी एक कठिन रिश्ते में ईमानदारी से उतारें — किसी ऐसे सहकर्मी के साथ जिसने आपको ठेस पहुँचाई हो, किसी ऐसे परिजन के साथ जो आपको ग़लत समझता हो — और दीवारें ढह जाएँगी। इसलिए नहीं कि दूसरा व्यक्ति बदल जाएगा — बल्कि इसलिए कि आप बदल जाते हैं।” आधुनिक जीवन के बारे में: “ख़ामोशी। बस ख़ामोशी की भाषा सीख लो। जब जागो तो शुकराने में रहो, और सोने से पहले सब्र को ओढ़ लो। यही ख़ामोशी ज़िक्र की, स्मरण की शुरुआत है। तसव्वुफ़ — सूफ़ीवाद — आपसे दुनिया छोड़ने को नहीं कहता। वह कहता है — इस दुनिया में पूर्ण रूप से, सचेत होकर उपस्थित रहो।” समापन — एक परिवार, एक प्रकाश हाजी चिश्ती ने शाम का समापन मौलाना रूमी (र.अ.) के उस शाश्वत आह्वान के साथ किया जो सदियों से असंख्य हृदयों को छूता और जगाता आया है: “आओ, आओ, जो भी हो तुम — आओ, चाहे हज़ार बार तोड़े हों तुमने अपने वादे — फिर भी आओ। हमारे द्वार निराशा के द्वार नहीं — हमारे द्वार आशा के द्वार हैं, आशा ही आशा।” दुनिया की महान ज्ञान-परम्पराओं से एकता का एक दीप्तिमान सूत्र बुनते हुए उन्होंने कहा — कुरआन-ए-करीम का अल-ख़लक़ु अयालुल्लाह — समस्त सृष्टि परमेश्वर का परिवार है; भारतीय वैदिक-सनातन परम्परा का वसुधैव कुटुम्बकम् — यह सम्पूर्ण पृथ्वी एक परिवार है; सूफ़ी दर्शन का वहदत अल-वुजूद — समस्त अस्तित्व की एकता; सनातन दर्शन का अद्वैत वेदान्त — समस्त सत्ता की अभिन्नता एवं अद्वैतता; और सिख आध्यात्मिक परम्परा का उद्घोष — अव्वल नूर, एक नूर, एक ओंकार — प्रथम प्रकाश, एक प्रकाश, एक ईश्वर, एक सृष्टि। “ये अलग-अलग रास्ते नहीं हैं,” उन्होंने गहरी शान्ति से कहा। “ये एक ही नदी को बयान करने वाली अलग-अलग भाषाएँ हैं — और वह नदी एक ही सागर की ओर बह रही है। प्रेम।” मीट एंड ग्रीट का सिलसिला निर्धारित समय से कहीं आगे तक चला — कई आँखें भर आईं, कुछ मौन हो गए, और सभी हृदय छू लिए गए। हाजी सैयद सलमान चिश्ती के बारे में 26वें गद्दीनशीन एवं वंश-परम्परागत कुंजी-संरक्षक, दरगाह ख्वाजा साहब, अजमेर शरीफ़ · अध्यक्ष, चिश्ती फ़ाउंडेशन – अजमेर शरीफ़ · 75 देशों में चिश्ती परम्परा का प्रतिनिधित्व · सूफ़ी मुसाफ़िर — आध्यात्मिक यात्री के रूप में विख्यात · सबसे प्रेम, किसी से वैर नहीं। द वैगाबॉन्ड क्लब के बारे में द वैगाबॉन्ड क्लब, सिंगापुर, एक ट्रिब्यूट पोर्टफोलियो होटल, सिंगापुर के सर्वाधिक प्रतिष्ठित स्वतंत्र होटलों में से एक है — जो कला, संस्कृति और रचनात्मक समुदाय का दीर्घकालिक संरक्षक एवं पोषक है, और दुनिया भर के कलाकारों, संगीतकारों, लेखकों, यात्रियों एवं विचारकों के लिए एक सच्चा मिलन-स्थल है। यह होटल गार्चा ग्रुप का अंग है, जिसका नेतृत्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरप्रीत बेदी गार्चा करती हैं।

+