"गवाहों के बयानों में विरोधाभास के चलते पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका की स्वीकार

अजमेर, 27 मई। अजमेर के विशिष्ट न्यायाधीश (पॉक्सो कोर्ट) श्रीमान मनोज कुमार गोयल ने 26 मई को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामले के एक आरोपी की जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है।
क्या था पूरा मामला?
नसीराबाद सदर थाने में परिवादी (पीड़िता के पिता/परिजन) ने मामला दर्ज कराया था कि आरोपी उसकी 14 वर्षीय नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर भगा ले गया था। आरोप था कि आरोपी ने लगातार 10 दिनों तक अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया और उसकी अश्लील तस्वीरें व वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल भी करता रहा। पुलिस ने इस मामले की जांच पूरी कर अदालत में चालान पेश किया था।
इस आधार पर मिली जमानत:
मुलजिम (आरोपी) की ओर से पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट अलादीन खान चीता और एडवोकेट मोईनुद्दीन चीता (नोसर) ने अदालत के सामने मजबूत तर्क रखे।
बचाव पक्ष के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि:
पुलिस द्वारा चालान पेश किए जाने के बाद कोर्ट में जो गवाहियां हुईं, उनमें काफी कमियां हैं।
पीड़िता, मुख्य परिवादी और अन्य गवाहों के बयानों में आपस में भारी कॉन्ट्राडिक्शन (विरोधाभास) है, जिससे कहानी संदिग्ध प्रतीत होती है।
कोर्ट का फैसला:
माननीय न्यायालय ने आरोपी के वकीलों (सीनियर एडवोकेट अलादीन खान चीता और मोईनुद्दीन चीता) के तर्कों और लंबी बहस से संतुष्ट होने के बाद, बयानों में आए विरोधाभास को आधार मानते हुए आरोपी को जमानत पर रिहा करने के आदेश जारी किए।

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