ऐसा क्यों है कि पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा गर्मी भारत में ही बढ़ रही है?

संपादक -अब्दुल क़ादिर ,
21 मई,गर्मी ने लोगों की हालत खराब कर दी है. भारत इस समय धरती का सबसे ज्यादा तपता हुआ देश बन गया है. रियल टाइम ग्लोबल तापमान रैकिंग के मुताबिक दुनिया के टॉप-100 सबसे गर्म शहरों में 95 से 98 भारत के शहर हैं. वहीं Aqi.in की लाइव रैकिंग में अत्यधिक गर्मी के मामले में सभी 100 शहर भारत के ही रखे गए हैं. खासतौर से उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके में, राजस्थान, तेलंगाना, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में गर्मी से हालात ज्यादा खराब हैं.
नेचर पत्रिका में हाल ही में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक पिछले दो दशकों में भारत में हीटवेव की तीव्रता और अवधि काफी बढ़ी है. रिसर्च में पाया गया कि गर्मी के हॉटस्पॉट अब नए इलाकों में फैल रहे हैं और अलनीनो जैसी मौसमी घटनाएं इसे और खराब कर रही हैं.
यही वजह है हर साल अप्रैल-मई की शुरुआत के साथ ही ये सताने लगती है. आंकड़ों के लिहाज से देखें तो हीट वेव के दिनों में ही 1961 से लेकर 2021 तक तकरीबन 2.5 दिन की बढ़ोतरी हो चुकी है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक आने वाले कुछ सालों में यह 12 से 18 दिन तक बढ़ सकती है. इसके अलावा अधिकतम तापमान में भी लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. 2024 में तो दिल्ली के मुंगेशपुर में ही अधिकतम तापमान 52.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था.
भारत में क्यों बढ़ रही लगातार गर्मी ?

1- भौगोलिक स्थिति: भारत में गर्मी बढ़ने की प्रमुख वजह भौगोलिक स्थिति है. दरअसल हमारा देश उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में है. कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच में पड़ने वाले हिस्से को ही उष्णकटिबंधीय क्षेत्र कहते हैं. यहां सूरज की किरणें ज्यादा सीधी पड़ती हैं, तापमान सामान्य से ज्यादा रहता है और मौसम में ठंडक कम रहती है. इसके अलावा उत्तर पश्चिम भारत, खासतौर से राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में थार मरुस्थल है जो गर्मियों में भीषण रूप से तप जाता है. यहीं से उठने वाली गर्म हवा लू बनकर पूरे भारत को झुलसा देती है.
2- शहरीकरण और हीट आइलैंड इफेक्ट : भारत में शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है. ग्रीन क्षेत्र कम हो रहा है, इससे हीट आइलैंड इफेक्ट की समस्या बन गई है. शहरी क्षेत्रों में इमारतें, कंक्रीट और फाल्ट गर्मी को सोखते हैं और लंबे समय तक बनाए रखते हैं. यही वजह है कि शहरी इलाकों में ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले ज्यादा तापमान रहता है. दिल्ली, नागपुर और अहमदाबाद ऐसे शहर हैं जो नियमित तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में कई डिग्री अधिक तापमान दर्ज कर रहे हैं. दरअसल जब आप कंक्रीट की सड़कें और इमारतें बनाते हैं तो गर्मी अंदर ही फंस जाती है और ऊपर नहीं उठती, इससे हवा और गर्म हो जाती है.
3- वन क्षेत्र कम होना: पेड़ एक नेचुरल एयरकंडीशनर माने जाते हैं, भारत में तेजी से हो रही जंगलों की कटाई ने इस कवच को तोड़ दिया है. क्लाईमेंट इम्पैक्ट स्ट्रैकर की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कृषि विस्तार और औद्योगीकरण के कारण भारी मात्रा में वनों की कटाई हुई है. जंगलों के नष्ट होने से वह संतुलन खत्म हो गया जो पेड़ रखते हैं. इससे तापमान में बढ़ता है और लू की तीव्रता भी बढ़ जाती है. वन सर्वेक्षण की रिपोर्टों के अनुसार, बुनियादी ढाँचे के विस्तार के कारण कई महानगरों में शहरी हरित क्षेत्र घट गया है जो सतह का तापमान बढ़ाने में बड़ी भूमिका अदा कर रहा है.
4- जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग : जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग भी कम बड़ी वजह नहीं है. 2014 से 2023 के बीच तक भारत ने सबसे गर्म दशक देखा. इस दौरान वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर 425 ppm की नई ऊँचाई पर पहुँच गया. इंटरगर्वनमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज यानी IPCC के अनुसार वैश्विक औसत तापमान पहले से ही पूर्व औद्योगिक स्तरों से लगभग 1.1°C ऊपर बढ़ चुका है. 2024 में महासागरों की गर्मी पिछले 65 वर्षों में सबसे उच्च स्तर पर पहुँच गई थी. विश्व मौसम संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, 1960 से 2005 के मुकाबले पिछले दो दशकों में महासागरों के गर्म होने की दर दोगुनी से भी अधिक हो गई है.
5- मानसून में देरी और एल निनो का प्रभाव : पूर्वी और मध्य भारत में मानसून के देरी से आने के कारण लू के हालात बने रहते हैं. इससे सूखे के हालात बनते हैं जो गर्मी बढ़ाते हैं. ऐतिहासिक आँकड़े बताते हैं कि एल नीनो के दौरान भारत में मानसूनी बारिश कम हो जाती है. 1877 में सुपर अलनीनो की वजह से भारत में ही लाखों लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी थी.
6- औद्योगिकीकरण और ऊर्जा की खपत : देश में औद्योगिकीकरण तेजी से बढ़ रहा है, इससे ग्रीनहाउस गैसें इकट्ठी होती हैं. खासकर गर्मी के मौसम में बिजली की मांग रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच जाती है. एसी फ्रिज, कारें सब ठंडक देने के बदले बाहर के तापमान को बढ़ाती हैं. यानी गर्मी से बचने की जितनी कोशिश की जाती है, गर्मी उतनी ही बढ जाती है.
ज्यादा गर्मी से क्या होंगे प्रभाव

गर्मी सिर्फ सताती नहीं, बल्कि जानलेवा भी साबित होती है. रिसर्च गेट की एक रिपोर्ट के मुताबिक 1992 से 2015 के बीच भारत में लू लगने से 24 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई. हाल ही में विशेषज्ञों के एक समूह ने वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन से मांग की है कि जलवायु संकट को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित की जाए. इसमें हीटवेव और गर्मी से होने वाली मौतों को बड़ा कारण बनाया जाता है. इसके अलावा खेती और मजदूरी पर असर होता है. रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादा गर्मी से कृषि उत्पादन घटता है, स्वास्थ्य खर्च बढ़ता है, और बाहरी गतिविधियों पर निर्भर व्यवसायों की आमदनी में भारी गिरावट आती है.

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