अजमेर दरगाह विवाद में अदालत का बड़ा फैसला: 3 नए पक्षकार शामिल, 9 प्रार्थियों की अर्ज़ी ख़ारिज कर लगाई 30-30 हज़ार की कॉस्ट

अब्दुल क़ादिर
अजमेर। 8मई, विश्व प्रसिद्ध अजमेर दरगाह शरीफ में हिंदू मंदिर होने के दावे को लेकर चल रहे बहुचर्चित मामले में सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट, अजमेर (पश्चिम) ने बड़ा आदेश जारी किया है। अदालत ने आदेश 1 नियम 10 सीपीसी 1908 के तहत दायर विभिन्न प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई करते हुए कई नए पक्षकारों को मामले में शामिल करने की अनुमति दी, जबकि कुछ आवेदनों को खारिज करते हुए संबंधित प्रार्थियों पर भारी कॉस्ट अधिरोपित की है। यह आदेश भगवान श्री संकटमोचन व अन्य बनाम दरगाह कमेटी अजमेर व अन्य, दीवानी वाद संख्या 66/2024 (सीआईएस संख्या 437/2024) में पारित किया गया। मामले को लेकर लंबे समय से धार्मिक, सामाजिक और कानूनी हलकों में चर्चा बनी हुई है। अदालत के ताजा आदेश के बाद यह विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। अदालत ने इन्हें बनाया पक्षकार न्यायालय ने प्रार्थी संख्या राजवर्धन सिंह परमार की ओर से दायर प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए उन्हें बतौर वादी संयोजित करने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा प्रार्थी मोईनिया फखरिया चिश्ती खुद्दाम ख्वाजा साहिब सैयदजादगान (पंजीकृत) दरगाह शरीफ अजमेर, दीवान सैयद जैनुल आबेदीन तथा , अंजुमन यादगार चिश्तियां शेखजादगान खुद्दाम ख्वाजा साहिब र.अ. (रजिस्टर्ड), त्रिपोलिया गेट, दरगाह शरीफ के पास अजमेर, जरिये अध्यक्ष शेखजादा अजीम मोहम्मद चिश्ती, की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए इन्हें बतौर प्रतिवादी शामिल करने के आदेश दिए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि विवाद की प्रकृति और सभी पक्षों की सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए इन पक्षकारों की उपस्थिति आवश्यक है। वादी पक्ष को दिए सख्त निर्देश न्यायालय ने वादी पक्ष को निर्देशित किया है कि आगामी पेशी से पहले संशोधित उनवान प्रस्तुत किया जाए और नए पक्षकारों को वाद पत्र सहित सभी संलग्न दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध करवाई जाएं। अदालत ने कहा कि प्रक्रिया की पारदर्शिता और न्यायिक व्यवस्था के अनुरूप सभी पक्षों को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करवाना अनिवार्य होगा। 9 प्रार्थियों के आवेदन खारिज, भारी कॉस्ट लगाई अदालत ने प्रार्थी संख्या 02 गुलाम दस्तगीर, 03 ए. इमरान, 04 राज जैन, 07 पीर सैयद नफीस मिया, 08 प्रिन्स सेन, 09 काजी मुनव्वर अली, 10 सैयद आरिफ अली चिश्ती तथा 12 काशिफ जुबैरी की ओर से दायर प्रार्थना पत्रों को निरस्त करते हुए प्रत्येक पर 30-30 हजार रुपये की कॉस्ट अधिरोपित की है। इस प्रकार कुल 9 प्रार्थियों पर कुल 2 लाख 70 हजार रुपये की कॉस्ट लगाई गई है। अदालत ने निर्देश दिए कि यह राशि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अजमेर में जमा कर उसकी रसीद न्यायालय में प्रस्तुत करनी होगी। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आदेश की पालना नहीं की जाती है तो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के तहत जुर्माना वसूली की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। आदेश 07 नियम 11 सीपीसी पर भी हुई सुनवाई अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि आदेश 07 नियम 11 सीपीसी से संबंधित प्रार्थना पत्रों पर दोनों पक्षों की बहस सुनी जा चुकी है। न्यायालय ने कहा कि विभिन्न लंबित प्रार्थना पत्रों के निस्तारण के बाद अब आगे की सुनवाई नियमानुसार की जाएगी। मामले में अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है, जिसे इस विवाद में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय से चर्चा में है मामला अजमेर दरगाह में हिंदू मंदिर होने के दावे को लेकर दायर यह वाद पिछले काफी समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। विभिन्न धार्मिक संगठनों, खुद्दाम संस्थाओं और अन्य पक्षकारों की ओर से न्यायालय में अलग-अलग दावे और आवेदन प्रस्तुत किए गए हैं। अदालत के इस ताजा आदेश को मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि अब कई नए पक्ष सीधे तौर पर मुकदमे का हिस्सा बनेंगे।

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