पश्चिम बंगाल चुनाव रिजल्ट से पहले सुप्रीम कोर्ट पहुंची ममता बनर्जी की TMC, सीजेआई ने कहा- तुरंत लिस्ट करो, आज सुनवाई
अब्दुल क़ादिर
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई के लिए याचिका दायर की है।
इस याचिका में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दो चरणों की मतगणना के लिए केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को पर्यवेक्षक (Counting Supervisors) के रूप में नियुक्त करने का निर्णय लिया गया था।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने इस मामले पर शनिवार को तत्काल सुनवाई के निर्देश दिए हैं।
TMC ने यह कदम तब उठाया, जब कलकत्ता हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया। इस याचिका में वोटों की गिनती के दौरान केंद्र सरकार के कर्मचारियों की नियुक्ति को चुनौती दी गई थी।
कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस कृष्णा राव ने अपने फैसले में कहा कि चुनाव आयोग को यह अधिकार है कि वह काउंटिंग सुपरवाइज़र और सहायक की नियुक्ति राज्य सरकार या केंद्र सरकार—किसी से भी कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि इस फैसले में कोई गैर-कानूनी बात नहीं है।
यह याचिका TMC की ओर से उस निर्देश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसे पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 30 अप्रैल को जारी किया था। इस निर्देश के अनुसार, हर काउंटिंग टेबल पर मौजूद सुपरवाइज़र या सहायक में से कम से कम एक व्यक्ति केंद्र सरकार या PSU का कर्मचारी होना अनिवार्य था।
TMC की ओर से वकील कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि यह निर्देश बिना उचित अधिकार के जारी किया गया है और यह केवल आशंकाओं पर आधारित है।
पार्टी ने यह भी चिंता जताई कि केंद्र सरकार के कर्मचारी सत्तारूढ़ पार्टी BJP से प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि काउंटिंग रूम में केवल सुपरवाइज़र ही नहीं होते, बल्कि माइक्रो ऑब्जर्वर, उम्मीदवारों के काउंटिंग एजेंट और अन्य स्टाफ भी मौजूद रहते हैं। ऐसे में किसी एक पक्ष के प्रभाव की संभावना को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील ने कहा कि सभी नियुक्तियां निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी राजनीतिक दल आयोग के निर्णय लेने की प्रक्रिया पर इस तरह सवाल नहीं उठा सकता। केंद्रीय कर्मचारियों को प्राथमिकता देने का उद्देश्य पारदर्शिता बनाए रखना और पक्षपात के आरोपों को रोकना है।
- Posted By:- Abdul Qadir || Date:- 02 May 2026
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