कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग में बड़ा सियासी भूचाल,5 प्रदेश पदाधिकारियों का सामूहिक इस्तीफा प्रोटोकॉल की अनदेखी और वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपेक्षा से नाराजगी,प्रदेश अध्यक्ष को सौंपा इस्तीफा—राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष भी रखेंगे अपनी बात

जयपुर, 14 अगस्त 2026। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अल्पसंख्यक विभाग में उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब विभाग के पांच प्रदेश पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। पदाधिकारियों ने संगठन में प्रोटोकॉल की कथित अनदेखी, जिला स्तर पर प्रदेश पदाधिकारियों को कार्यक्रमों एवं बैठकों में उचित सम्मान नहीं दिए जाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपेक्षा को इस्तीफे की प्रमुख वजह बताया है। जानकारी के अनुसार हाजी मोहम्मद इकबाल काजी (प्रदेश महासचिव एवं उदयपुर देहात जिला प्रभारी), सोनू खां कायमखानी (प्रदेश सचिव एवं पाली जिला प्रभारी), मोहम्मद मुनीर लोहार (प्रदेश सचिव एवं सह प्रभारी अजमेर ग्रामीण), आरिफ मोहम्मद बिसायती (प्रदेश कोर्डिनेटर एवं सह प्रभारी प्रतापगढ़) तथा फारूक मोहम्मद मंसूरी एडवोकेट (प्रदेश कोर्डिनेटर एवं सह प्रभारी अजमेर शहर) ने 12 अगस्त को प्रदेश अध्यक्ष एम.डी. चोपदार से मुलाकात कर अपने-अपने पदों से सामूहिक त्यागपत्र सौंपा। प्रोटोकॉल की अनदेखी को लेकर नाराजगी पदाधिकारियों का आरोप है कि जिला स्तर पर अल्पसंख्यक विभाग के जिलाध्यक्षों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में प्रदेश पदाधिकारियों को आमंत्रित नहीं किया गया, जिससे संगठनात्मक प्रोटोकॉल की अनदेखी हुई। उनका कहना है कि प्रदेश स्तर पर जिम्मेदारी संभाल रहे पदाधिकारियों को जिला एवं ब्लॉक स्तर पर उचित सम्मान और समन्वय मिलना चाहिए। उदयपुर की बैठक में नहीं बुलाने पर भी उठे सवाल प्रदेश महासचिव एवं उदयपुर देहात जिला प्रभारी हाजी मोहम्मद इकबाल काजी ने आरोप लगाया कि उदयपुर संभाग की बैठक में उन्हें नहीं बुलाया गया। इस्तीफा देने वाले पदाधिकारियों ने इसे वरिष्ठ प्रदेश पदाधिकारी की उपेक्षा बताते हुए अपनी नाराजगी जताई है। भीलवाड़ा ग्रामीण क्षेत्र के पदाधिकारियों की उपेक्षा का आरोप इस्तीफा देने वाले नेताओं ने विशेष रूप से भीलवाड़ा ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले प्रदेश पदाधिकारियों को उनके गृह क्षेत्र में पर्याप्त तवज्जो नहीं दिए जाने का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि मोहम्मद मुनीर लोहार करीब 25 वर्षों से कांग्रेस संगठन में विभिन्न पदों पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बीगोद नगर अध्यक्ष एवं मांडलगढ़ ब्लॉक अध्यक्ष पदों के लिए योग्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं के नाम सुझाए, लेकिन उनकी राय को कथित रूप से नजरअंदाज किया गया। इसी प्रकार सोनू खां कायमखानी एवं आरिफ मोहम्मद बिसायती के संबंध में भी आरोप लगाया गया कि उनके गृह क्षेत्र में संगठनात्मक नियुक्तियों में उन्हें उचित महत्व नहीं दिया गया। फारूक मंसूरी के पद को लेकर भी नाराजगी फारूक मोहम्मद मंसूरी एडवोकेट ने पूर्व में चित्तौड़ जिले के प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी निभाई थी। इस्तीफा देने वाले पदाधिकारियों का कहना है कि उन्हें बिना किसी गलती के चित्तौड़ प्रभारी पद से हटाकर अजमेर शहर का सह प्रभारी बनाया जाना उनके लिए सम्मानजनक स्थिति नहीं रही। भीलवाड़ा बैठक को लेकर भी सवाल पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि प्रदेश अध्यक्ष के हालिया भीलवाड़ा दौरे के बाद आयोजित जिला स्तरीय बैठक में भी सभी प्रदेश पदाधिकारियों को नहीं बुलाया गया और कथित तौर पर केवल दो पदाधिकारियों को ही आमंत्रित किया गया। इसे भी उन्होंने संगठनात्मक स्तर पर उपेक्षा बताया। जिला कार्यकारिणी में राय नहीं लेने का आरोप इस्तीफा देने वाले नेताओं ने जिला कार्यकारिणी के गठन में प्रदेश पदाधिकारियों की राय को नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने बिजौलिया ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में सत्तार मोहम्मद की नियुक्ति का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि वे कांग्रेस के पद पर रहते हुए भाजपा के कार्यक्रम में शामिल होकर भाजपा विधायक गोपाल खंडेलवाल के साथ मंच साझा कर चुके हैं। पदाधिकारियों के अनुसार इस मामले में भी प्रदेश नेतृत्व का अपेक्षित संज्ञान नहीं लिया गया। वरिष्ठता की अनदेखी का आरोप हाजी मोहम्मद इकबाल काजी ने अल्पसंख्यक विभाग में करीब 15 वर्षों से सक्रिय रहने और लंबे समय तक भीलवाड़ा जिला अध्यक्ष तथा अजमेर संभाग अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभाने का हवाला देते हुए वरिष्ठता की अनदेखी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वर्तमान प्रदेश कार्यकारिणी में विभाग के वरिष्ठ नेताओं में उनका नाम प्रमुख है, इसके बावजूद उनसे कनिष्ठ नेताओं को प्रभारी बनाया जाना उचित नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष एम.डी. चोपदार के व्यवहार एवं सम्मान के कारण वे लगातार संगठन में काम करते रहे। प्रदेश नेतृत्व के समक्ष कई बार उठाई थी बात सामूहिक इस्तीफा देने वाले पदाधिकारियों का कहना है कि इन सभी मुद्दों को पूर्व में कई बार प्रदेश नेतृत्व के संज्ञान में लाया गया, लेकिन अपेक्षित सकारात्मक समाधान नहीं होने के कारण वे स्वयं को उपेक्षित एवं ठगा हुआ महसूस कर रहे थे। उनका कहना है कि पद पर रहकर मन से काम करने के बजाय संगठन के हित में कार्यकर्ता के रूप में काम करना बेहतर है। इसी सोच के साथ उन्होंने सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा देने का निर्णय लिया। कांग्रेस से रिश्ता कायम, राष्ट्रीय नेतृत्व से मिलेंगे पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा कांग्रेस पार्टी से नहीं, बल्कि संगठन में मिले पदों से है। उन्होंने राष्ट्रीय नेतृत्व को भरोसा दिलाया है कि वे कांग्रेस के सिपाही हैं और आगे भी पार्टी के लिए काम करते रहेंगे। बताया गया है कि सामूहिक त्यागपत्र कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी को भी भेजा गया है। पांचों पदाधिकारी जल्द ही नई दिल्ली जाकर राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात कर पूरे मामले से अवगत कराने तथा व्यक्तिगत रूप से अपना इस्तीफा सौंपने की तैयारी में हैं। अब देखना यह होगा कि राजस्थान कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग में पांच वरिष्ठ पदाधिकारियों के सामूहिक इस्तीफे के बाद प्रदेश नेतृत्व इस पूरे विवाद को किस तरह सुलझाता है और राष्ट्रीय नेतृत्व इस मामले में क्या कदम उठाता है।

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